19 दिसंबर 2020 - 17:40
इस्राईल से संबंध का इनाम!  थूक और जूतों  से होता है यूएई और बहरैन के लोगों का स्वागत, यहूदियों के दरवाज़े से जाते हैं अंदर... इस्राईली टीवी की रोचक रिपोर्ट

इस्राईल के टीवी चैनल-11 की एक रिपोर्ट में इस सवाल का जवाब तलाश करने की कोशिश की गयी है कि मस्जिदुल उक्सा पर किसका क़ब्ज़ा है?

   रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्राईल के साथ मेल जोल की सभी कोशिशों के बावजूद, इस्राईल के साथ संबंध बनाने वाले देशों के पर्यटकों के साथ आम अरबों और मुसलमनों का रवैया अच्छा नहीं है।

     इस्राईली रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिदुल अक़्सा पर अब भी जार्डन का प्रभाव है। अपने इस दावे के सुबूत के लिए इस्राईली टीवी चैनल ने मस्जिदुल अक़्सा में लगे नोटिस बोर्ड को दिखाते हुए कहा कि यह नोटिस बोर्ड जार्डन सरकार की ओर से है और इस्राईल से इसका कोई संबंध नहीं है। इसी तरह रिपोर्ट में बताया गया है कि बैतुल मुक़द्दस में इस्लामी वक्फ बोर्ड, फिलिस्तीनी प्रशासन से नहीं बल्कि अम्मान से आदेश लेता है। रिपोर्ट में दिखाया गया है कि किस तरह से जब मस्जिदुल अक्सा के  गार्डों से रिपोर्टर ने बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इस्राईली टीवी चैनल से बात करने से इन्कार कर दिया।

     इस्राईली टीवी चैनल की रिपोर्ट में बताया गया है कि जब यूएई और बहरैन के लोग मस्जिदुल अक़्सा में जाते हैं तो क्या होता है? इसी तरह एक कट्टरपंथी यहूदी संगठन के सदस्य ने टीवी चैनल से बात चीत में बताया कि यहूदियों को बस एक ही दरवाज़े से मस्जिदुल अक़सा में प्रवेश की अनुमति है और वह भी विशेष दिनों और समय पर।

 

     सब से हैरत की बात यह पता चली कि जब यूएई और बहरैन के मुसलमान मस्जिदुल अक़्सा में नमाज़ पढ़ने के लिए आते हैं जो मुसलमानों के प्रवेश से विशेष दरवाज़ों से मस्जिदुल अक्सा के अंदर जाने से डरते हैं क्योंकि फिलिस्तीनी, उन पर थूकते हैं और जूते फेंकते हैं और इस तरह से वह यूएई और बहरैन द्वारा इस्राईल के साथ संबंध बनाने के प्रति अपना विरोध प्रकट करते हैं।

     इस्राईली टीवी चैनल की रिपोर्ट में बताया गया है कि मस्जिदुल अक्सा के पास मौजूद यहूदी, यूएई और बहरैन के मुसलमानों को अपने घेरे में लेकर यहूदियों के दरवाज़े से मस्जिदुल अक्सा में ले जाते हैं ताकि फिलिस्तीनियों की ओर से उन्हें अपमान का शिकार न बनना पड़े।

     इस रिपोर्ट में इस्राईली टीवी चैनल ने आरोग लगाया है कि मस्जिदुल अक्सा में नमाज़ पढ़ने वाले फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मानकों पर ध्यान नहीं देते किंतु रिपोर्ट देख कर अच्छी तरह से अंदाज़ा होता है कि मस्जिदुल अक्सा के ज़िम्मेदार और वहां मौजूद फिलिस्तीनी, इस्राईली टीवी चैनल से बात भी करना पसंद नहीं करते जिससे पता चलता है कि इस्राईल के साथ संबंध बनाने वाले देशों का इस्लामी जगत की जनता की नज़रों में क्या स्थान है?

     वैसे इस्राईली टीवी चैनल में हमेशा की तरह यह नहीं बताया गया कि इस्राईल और यहूदी मस्जिदुल अक्सा में क्या क्या करते हैं।

     इसी मध्य खबर है कि सऊदी अरब ने इस्राईल के साथ संबंध बनाने के लिए जो शर्तें रखी हैं उनमें से एक यह भी है कि मस्जिदुल अक्सा की देख रेख जार्डन नहीं बल्कि सऊदी अरब करेगा।